Wednesday, April 8, 2009

उन्हे मित्र और दुश्मन मे फर्क करना सीखना होगा !

मै उन लोगो की इस बात से पुर्णतया सहमत हू जो कहते है कि मुस्लिम समुदाय आज भी बहुतायात मे अशिक्षित और अज्ञानी है ! यह समुदाय दकियानूसी परम्परा और रूढिवाद के जाल मे इतनी बुरी तरह फ़ंसा है कि इनके तथाकथित धर्मगुरु अपने स्वार्थो के लिये इनका भरपूर शोषण करते आये है! सच ही कहा है कि इनके लिये आरक्षण के भी कोई मायने नही है! पढ़ा लिखा होगा तभी तो आरक्षण का भी फायदा उठा पायेगा ! लेकिन आश्चर्य इस बात पर होता है कि कम से कम इस देश मे तो इनके इतनी शुभचिन्तक पार्टियो जैसे कोंग्रेस, बामपंथी पार्टिया, एसपी, बीएसपी.. इत्यादि, इत्यादि, लगभग सभी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियो के रह्ते हुए भी, ऐसी स्थिति क्यो है? इस पर न तो किसी राजनैतिक दल ने ज्यादा प्रकाश डालना उचित समझा और न ही मुस्लिम बुद्धिजीवियो ने यह जानने की कभी कोशिश की ! पिछ्ले साठ बर्षो से ये पार्टिया, मुसलमानों की शुभचिन्ता के नाम पर इनसे वोट मांगते आये है और इन्होने भी इन्हे खूब जिताया है! बद्ले मे इन्होने इन्हे लौलीपोप के अलावा क्या दिया? कितनी हास्यास्पद बात है कि पिछ्ले पांच सालो तक सत्ता सुख भोगने के बाद आज इनके मातहत मुस्लिम दरीद्र्ता के लिये भी हिन्दुवादि पार्टियो को दोष देती है, यहा भी झांसा देने की कोशिश ! कोई इनसे पूछे कि अपनी आंखो से हिन्दुत्व का पर्दा उतारकर, एक बार ईमानदारी से एनडीए और यूपीए की सरकारो की उप्लब्धियो और कामो का तुलनात्मक अध्य्यन करे, तो पावोगे कि एनडीए इनसे कही बेह्तर सरकार थी, बीजेपी पर दोषारोपण किया जाता है कि उसने अपने कार्यकाल मे ऐसा किया, वैसा किया ! मै कह्ता हू, उन्होने कुछ किया तो सही, मगर तुमने एक दूसरे की टांग खीच, घडियाली आंसु बहाने के सिवाये और कुछ किया क्या? बार-बार गुजरात दंगो का भूत दिखाकर मुसलमानो और अन्य अल्पसंख्य्को को डराते रहते हो,ताकि वे तुम्हारे पाले में बने रहे ,मगर तनिक अपने गिरेवान मे भी तो झांककर देखो कि तुमने नन्दीग्राम मे क्या किया ? दिल्ली और अन्य स्थानों पर क्या किया, बिहार में क्या किया ? और अब उन्ही नवीन पट्नायक के साथ क्या कर रहे हो जिनके ऊपर अभी कुछ महिनो पहले तक कन्ध्माल हिंसा का दोष लगाकर थूक रहे थे ? क्योंकि वो अब आपके खेमे संग हो लिये, तो वे पाक-साफ़ हो गये ?


यह मुस्लिम समुदाय की शिक्षा की ही खामिया है कि ये लोग आज भी अपने सच्चे मित्र और असली दुश्मन मे फर्क कर पाने मे असमर्थ है! और इनकी इसी कमी अथवा खामियो के चलते इस बात का सीधा फ़ायदा हो रहा है, हमारे इन राजनैतिक दलो को, जो सेक्युलरिज्म की दुहाई देकर इन्हे सरेआम उल्लू बना रहे है ! किसी ने अंग्रेजो के नक्शे कदम पर चलकर प्यार से फूट डालो और राज करो की नीति अपनाकर अपना उल्लु सीधा किया तो कुछ अन्य तथाकथित सेक्युलर पार्टिया और उनके दिग्गज नेता है, जो इन्हे किसी की छाती पर रोलर चलाने और किसी के हाथ काट डालने का झुनझुना पकडा रहे है ! ध्यान रहे कि सच्चा मित्र वो नही होता जो आपसे हमेशा मीठा बोलकर अपना उल्लू सीधा करता है, बल्कि सच्चा मित्र वह है जो आपके मुह पर आपकी कमियां आपकी खामियां गिनाता हो, ताकि आप अन्धेरे मे न रहे, और सुधार लाने का प्रयत्न कर सकें ! इन तथाकथित सेक्युलर पार्टियो ने पिछ्ले साठ-बासठ सालो से आपसे सिर्फ़ मीठा बोला है और नतीजा आप यह भुगत रहे है कि मुसलमान हर क्षेत्र मे पिछड गया है !


इसलिये अभी भी वक्त है सही दोस्त् और दुश्मन को पह्चानिये और बाद मे पछ्ताने से बचिये! सिर्फ तुष्टीकरण से कुछ नहीं होने वाला! और एक बार इमानदारी से देखो कि पिछले ६०-६२ सालो में इस तुष्टिकरण से चाँद मौलवियों को छोड़ आपको क्या फायदा हुआ ? जैसा कि मैंने पहले कहा, हमारी यह राजनीति एक कूडे का ढेर बन चुकी है और इसी कूडे में से हमें कुछ उपयोगी वस्तुए ढूँढनी है ! यह आप भी जानते है और मैं भी कि आज कोई भी राजनैतिक दल ईमानदार नहीं रहा, मगर वो कहावत है कि डाकुवो में भी वो डाकू थोडा ठीक लगता है जो कुछ तो वसूल रखता हो ! इसलिए अपना वोट सोच समझकर, धार्मिक चश्मा उतारकर और संकीर्णता से ऊपर उठकर करे !

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